अभी आप आ चुके ख़ुशी नगर में, ख़ुशी नगर भारतका सबसे ज्यादा खुश रहने वाला गाँव हे. आज हम ख़ुशी नगर के दो परिवारकी कहानी जानेंगे.
आइये मिलते हे ख़ुशी नगर के इन दोनों परिवारसे, एक हे आलोक जी का परिवार और दूसरा सनिपाल जी का परिवार.
आलोक जी एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हे, वे खेत मजदूरी के कामकाज से जुड़े हे. उनके परिवार में कुल चार लोग हे जिनमे वो खुद, उनकी पत्नी पलवी जी और उनके दो बच्चे बबली और बंटी. उनकी आयु ३० सालकी हे उनकी मासिक आमदनी १६००० रुपयें के आसपास हे. जोभी आय हो रही हे उनमे से परिवार की जीवन जरूरतों के लिए कुल खर्च १५००० रुपयें के आसपास का रहता हे. उनके के पास हर महीने १००० रुपये तक बच जाता हे.
सनिपाल जी भी एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हे और वेभी खेत मजदूरी के कामकाज से जुड़े हे. उनके परिवार में कुल ६ लोग हे जिनमे वो खुद, उनकी पत्नी राधा जी और उनके माता-पिता और दो बच्चे विराट और प्रियंका. उनकी आयु भी ३० सालकी हे उनकी मासिक आमदनी १५००० रुपयें के आसपास हे. जोभी आय हो रही हे उनमे से परिवार की जीवन जरूरतों के लिए कुल खर्च १३००० रुपयें के आसपास का रहता हे. वो हर महीने २००० तो बचा ही लेते हे.
दोनों परिवार को आप नजदीक से देखेंगे तो बहुत बड़ा अंतर नजर आता हे फिर भी बचत में चोकाने वाला परिणाम. आलोकजी के परिवारमे ४ सदस्य हे वंहा सनिपाल जी के परिवारमे कुल ६ सदस्य हे और आलोकजी की आय १६००० रुपयें हे वंहा सनिपाल जी के आय १५००० रुपयें हे. आलोकि जी अपने कुल खर्च करके १००० रुपयें तक बचा पाते हे और सनिपाल जी २००० बचा लेते हे. आलोक जी से १००० रुपयें ज्यादा.
आलोक जी अपनी बचत का सही इस्तमाल करते हुए अपनी ३० साल की उम्र से ही १००० हजार रुपयें की बेंक में फिक्स्ड डिपोजिट करवाते हे. सनिपाल पाल जी भी ऐसा ही करते हे, वो भी अपनी ३० साल की उम्र से अपने पास बच रहे २००० रुपयें में से १००० रुपयें बेंक में फिक्स्ड डिपोजिट जमा कर ते हे और १००० हजार रुपयें वो अपने पेंशन (NPS) खातेमे डालते हे. वह थोड़े ज्यादा समजदारी से अपने पैसे को बचाते हे (पेंशन के बारे में उनके कंपनी में पिन्बोक्स कंपनी द्वारा NPS जागृत कार्यक्रम चलाया गया था वंहा से उनको यह प्रेरणा मिली) आज की तारीख में फिक्स्ड डिपोजिट पर ५.५% ब्याज हे और NPS जो मुनाफा मिलाता हे उनका रेट करीब करीब १०% के आसपास हे.
दोनों परिवार की आय बहुत कम होने के कारण दोनों परिवार हर महीने ऊपर बताई गए राशी से ज्यादा पैसा नहीं बचा पाते थे. इस तरह से वह दोनों अपने ६० वर्ष की उम्र तक समान तरीके से बचत करते रहते हे. जब दोनों निवृत हुए तब दोनों परिवार के पासे बचत किये हुए पैसे ही जीवन निर्वाह का साधन था. दोनों ने अपनी बचत की हुई कुल जमा राशी बेंक से निकाल ली. तब दोनों के पास फिक्स्ड डिपोजिट से आये ८३५००० रुपयें थे. पर सनिपाल जी के पास औरभी हर महीने पेंशन आणि सुरु हो गए जो करीबन ११३९७ रुपयें होगी.
दोनों परिवार फिक्स्ड डिपोजिट के पैसे से निवृति के समय ५ साल अच्छे से बिता लेते हे और ५ साल के बाद दोनों के पास फिक्स्ड डिपोजिट के पैसे ख़तम हो जाते हे. मुश्किले अब सुरु होती हे. अब यहाँ दोनों के पैसे ख़तम हो गए और शरीर भी काम करके कुछ कम सके ऐसा रहा नहीं. अबसभी प्रकार की समस्याओ का सामना एक करना पड़ रहा हे. पर सनिपाल जी के पासे तो हर महीने सुरक्सित पेंशन ११३२७ रुपये आने लगी वो तो ख़ुशी से अपना जीवन पसार कर रहे हे.
इसका मतलब अब आलोको जी अपने बचे पे निर्भर हे, वहीं सनिपाल जी ख़ुशी नगर में राधाजी के साथ ख़ुशी से अपना बुढ़ापा बिता रहे और जरूरत पड़ने पे अपने बचे को भी मदद करते हे. एक और महत्वपूर्ण बात यह हे की सनिपाल जी ने अपने दोनों बच्चे विराट और प्रियंका का १८ साल होने पर NPS में पेंशन खाता खुलवा दिया था.
चलो आज से हम भी अपने बुढ़ापे के लिए पैसा बचा के अच्छी शुरुआत करते.
टेंशन नहीं हे, पेंशन हे.
Mehul